अब बदल सकती है भारतीय करेंसी की तस्वीर, RBI ला सकता है पॉलिमर नोट
RBI जल्द ही यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और कई अन्य देशों की तरह भारत में भी पॉलिमर (प्लास्टिक) करेंसी नोट लागू करने पर विचार कर रहा है। ये नोट पारंपरिक कागज़ी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और गंदगी, नमी व जल्दी खराब होने जैसी समस्याओं से बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं।
RBI ला सकता है प्लास्टिक करेंसी नोट, भारत की नोट व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) एक बार फिर पॉलीमर बैंकनोट्स को चलन में लाने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह वही प्रस्ताव है जिस पर लगभग एक दशक पहले चर्चा हुई थी, लेकिन अब बढ़ती छपाई लागत और हर साल बड़ी संख्या में खराब हो रहे कागज़ी नोटों को देखते हुए इसे दोबारा आगे बढ़ाया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, RBI जल्द ही इस दिशा में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा कर सकता है। इस मुद्दे पर हाल ही में पटना और मुंबई में हुई बोर्ड बैठकों में चर्चा हुई है। शुरुआती चरण में ₹10 और ₹20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों को टेस्ट किया जा सकता है, क्योंकि ये नोट रोजमर्रा के इस्तेमाल में सबसे ज्यादा जल्दी खराब होते हैं।
क्या होते हैं पॉलीमर बैंकनोट?
पॉलीमर बैंकनोट सामान्य कागज़ी नोटों की तरह नहीं होते। इन्हें कॉटन-बेस्ड पेपर की जगह एक विशेष पतले और लचीले प्लास्टिक सब्सट्रेट पर प्रिंट किया जाता है।
हालांकि इन्हें “प्लास्टिक नोट” कहा जाता है, लेकिन ये कार्ड की तरह कठोर नहीं होते। ये हल्के, मोड़ने योग्य और इस्तेमाल में लगभग कागज़ी नोटों जैसे ही होते हैं।
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे कई देशों में पॉलीमर नोट पहले से सफलतापूर्वक उपयोग किए जा रहे हैं।
पॉलीमर नोट क्यों हैं खास?
1. ज्यादा टिकाऊ
कागज़ी नोट जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं और नमी से खराब हो जाते हैं। पॉलीमर नोट इन समस्याओं से काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं।
2. नकली नोटों पर रोक
इनमें सी-थ्रू विंडो, माइक्रो-ऑप्टिक फीचर्स, होलोग्राम और विशेष सुरक्षा इंक जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल की जा सकती हैं, जिससे नकली नोट बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
3. लंबे समय तक उपयोग
एक पॉलीमर नोट की उम्र कागज़ी नोट की तुलना में कई गुना अधिक होती है। इससे बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम होगी।
(RBI ला सकता है प्लास्टिक करेंसी नोट)
RBI को इससे क्या फायदा होगा?
भारत में हर साल करोड़ों नोट खराब होकर सिस्टम से बाहर हो जाते हैं। इन्हें बदलने और नए नोट छापने पर RBI को भारी खर्च उठाना पड़ता है।
अगर पॉलीमर नोट सफल होते हैं, तो:
- छपाई लागत में कमी आएगी
- नोटों की लाइफ बढ़ेगी
- नकली नोटों पर नियंत्रण मजबूत होगा
- बैंकिंग सिस्टम पर दबाव कम होगा
क्या भारत में जल्द दिखेंगे पॉलीमर नोट?
फिलहाल RBI की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में भारत के लोग पहली बार बड़े पैमाने पर पॉलीमर करेंसी नोट इस्तेमाल करते नजर आ सकते हैं।
यह कदम भारतीय करेंसी सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

