B’day Special: एक वक्त पर टूट गए थे सर जडेजा, फिर किया मां का सपना पूरा

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भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा आज अपना 34वां जन्मदिन मना रहे हैं। क्रिकेट जगत से लेकर बॉलीवुड स्टार तक सभी ने इस धाकड़ खिलाड़ी को विश किया है। ट्विटर पर सर जडेजा ट्रेंड कर रहें हैं। इसी सिलसिले में महेंद्र सिंह धोनी का पुराना ट्वीट खूब वायरल हो रहा है जहां पिछले साल जडेजा को विश करते हुए धोनी ने लगातार कई ट्वीट किये थे।

जडेजा चोट के कारण टीम से बाहर

सर जडेजा ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। कम समय में टीम को जरुरी रन बनाकर एक अहम योगदान देते हैं। फील्डिंग, और गेंदबाजी में भी इनका कोई जवाब नहीं हैं। फिलहाल वे चोट के चलते बाहर हैं लेकिन उनके जल्द ही ठीक होने की उम्मीद है। जडेजा को हर कोई एक मजबूत खिलाड़ी के रुप में जानता है लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

पिता चाहते थे आर्मी ऑफीसर बनना

रवींद्र जडेजा का जन्म 6 दिसंबर 1988 में गुजरात के जामनगर में हुआ था। जडेजा के पिता अनिरुद्ध जडेजा एक सिक्योरिटी एजेंसी में चौकीदार थे और वो अपने बेटे को सेना में देखना चाहते थे। लेकिन जडेजा का मन क्रिकेट में रम गया। वो अपने पिता की चाहत पूरी नहीं कर सके। जबकि जडेजा की मां का सपना था कि उनका बेटा क्रिकेटर बने।

उन्होंने अपने मां के सपने को साकार करने के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। हालांकि मां अपने बेटे को ब्लू शर्ट में देख नहीं सकी। साल 2005 में कार दुर्घटना में उनका निधन हो गया था। तब रवींद्र जडेजा 17 साल के थे। अंत में 10 फरवरी 2009 का वह दिन आया जब जडेजा को भारतीय टीम की ब्लू कैप मिली।

जडेजा हैं घोड़े के शौकीन

जडेजा का पसंद कुछ अलग है। आमतौर पर सेलेब्रिटी महंगी गाड़ियों के शौकीन होते हैं। लेकिन जडेजा महंगी गाड़ियां तो रखते ही हैं साथ ही में उनके पास दो घोड़े भी हैं। उनके पास तेज गति से चलने वाली ऑडी कार के अलावा सुजुकी हायाबुशा है। जामनगर के पास उनका फार्महाउस है जहां वह अपनी पसंद के कई शानदार घोड़े रखते हैं। जडेजा को तलवारबाजी का भी शौक है।

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में तीन बार ट्रिपल सेंचुरी लगाने का रिकॉर्ड