Delimitation Commission Act 2026: लोकसभा में अमित शाह ने दिया बड़ा आश्वासन, जानें दक्षिण भारत की सीटों का नया गणित
Delimitation Commission Act 2026: भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में परिसीमन विधेयक, 2026 (Delimitation Bill, 2026), संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कई महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिए हैं।
इस ऐतिहासिक चर्चा में गृह मंत्री ने विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि नए परिसीमन से किसी भी राज्य, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ कोई अन्याय नहीं होगा। उन्होंने आंकड़ों के साथ यह साबित किया कि परिसीमन विधेयक, 2026 से दक्षिणी राज्यों को नुकसान नहीं, बल्कि सीधा फायदा होने जा रहा है।
आइए समझते हैं गृह मंत्री अमित शाह के लोकसभा संबोधन की प्रमुख बातें, सीटों का नया फॉर्मूला और देश के चुनाव ढांचे पर इसका क्या असर पड़ेगा।
Delimitation Commission Act 2026: दक्षिण भारत की लोकसभा सीटों में होगी बंपर बढ़ोतरी (50% इंक्रीज मॉडल)
विपक्ष और क्षेत्रीय दलों द्वारा लगातार यह चिंता जताई जा रही थी कि जनसंख्या नियंत्रण के सफल प्रयासों के कारण दक्षिण भारत के राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी कम हो जाएगी। गृह मंत्री अमित शाह ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए 50% बढ़ोतरी मॉडल (50% Increase Model) का खुलासा किया।
इस मॉडल के तहत, लोकसभा की कुल सीटें वर्तमान 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी। सीटों की इस वृद्धि में दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व भी आनुपातिक रूप से बढ़ेगा:
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कुल दक्षिणी सीटें: दक्षिण भारत के राज्यों की मौजूदा 129 सीटें बढ़कर 195 हो जाएंगी।
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सदन में कुल हिस्सेदारी: लोकसभा के कुल आकार में दक्षिण भारत की हिस्सेदारी लगभग 24 प्रतिशत पर बरकरार रहेगी, जो पहले के समान ही है।
Delimitation Commission Act 2026
Delimitation Commission Act 2026: राज्यवार सीटों का नया गणित (प्रस्तावित परिसीमन 2026)
गृह मंत्री ने लोकसभा पटल पर विभिन्न दक्षिणी राज्यों की सीटों के बढ़ने और उनकी हिस्सेदारी का स्पष्ट आंकड़ा प्रस्तुत किया:
| राज्य (State) | वर्तमान सीटें | प्रस्तावित सीटें (50% मॉडल के बाद) | सदन में हिस्सेदारी का प्रतिशत (लगभग) |
| तमिलनाडु (Tamil Nadu) | 39 | 59 | 7.18% से बढ़कर 7.23% |
| कर्नाटक (Karnataka) | 28 | 42 | 5.14% (लगभग समान) |
| आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) | 25 | 38 | 4.60% से बढ़कर 4.65% |
| तेलंगाना (Telangana) | 17 | 26 | 3.13% से बढ़कर 3.18% |
| केरल (Keralam) | 20 | 30 | लगभग समान |
📌 मुख्य बात: गृह मंत्री ने तमिलनाडु की जनता को विशेष रूप से आश्वस्त करते हुए कहा, “मैं तमिलनाडु के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि आपकी ताकत कम नहीं होगी, बल्कि बढ़ रही है।”
Delimitation Commission Act 2026: 2029 से पहले लागू नहीं होगा नया परिसीमन
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह की जल्दबाजी या राजनीतिक हेरफेर का प्रयास नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इस प्रक्रिया की समय-सीमा को लेकर दो बड़ी बातें साफ कीं:
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कानून में कोई बदलाव नहीं: सरकार ने परिसीमन आयोग अधिनियम (Delimitation Commission Act) में पूर्ण विराम (full stop) और अल्पविराम (comma) तक का कोई बदलाव नहीं किया है, बल्कि पुराने अधिनियम को ही दोहराया है।
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लागू होने का वर्ष: परिसीमन आयोग की रिपोर्ट संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की सहमति के बाद ही लागू होगी। इसलिए, वर्ष 2029 से पहले इस प्रक्रिया के लागू होने का कोई सवाल ही नहीं उठता। 2029 तक होने वाले सभी चुनाव मौजूदा सीटों और पुरानी व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे।
जातिगत जनगणना (Caste Census) पर गृह मंत्री का स्पष्टीकरण
चर्चा के दौरान जब जातिगत जनगणना का मुद्दा उठा, तो गृह मंत्री ने देश के सामने इसकी प्रक्रिया को बेहद सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि जनगणना दो चरणों में पूरी होती है:
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पहला चरण: मकानों का सूचीकरण (Enumeration of houses)। वर्तमान में यही पहला चरण चल रहा है। चूंकि मकानों की कोई जाति नहीं होती, इसलिए इस चरण के फॉर्म में जाति का कोई विकल्प नहीं है।
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दूसरा चरण: व्यक्तियों की गणना (Enumeration of individuals)। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि जातिगत जनगणना का सवाल केवल तब उठेगा जब इस दूसरे चरण यानी व्यक्तिगत स्तर पर लोगों की गिनती शुरू होगी।
“लोकतंत्र को खत्म करने की क्षमता किसी में नहीं”
विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए गृह मंत्री ने भारत के लोकतंत्र की ताकत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता राजनीतिक दलों या नेताओं की इच्छा से नहीं, बल्कि नागरिकों की सोच और संकल्प से तय होती है। देश की 130 करोड़ से अधिक आबादी के जनादेश के साथ कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता और जब भी इतिहास में ऐसा प्रयास हुआ है, जनता ने उसे सिरे से खारिज कर दिया है।
Delimitation Commission Act 2026
निष्कर्ष (Conclusion)
लोकसभा में पेश किया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक भारतीय प्रतिनिधित्व प्रणाली को अधिक मजबूत और व्यापक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार के इस भरोसे के बाद कि दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी में कोई कमी नहीं आएगी, इस ऐतिहासिक सुधार को लेकर राजनीतिक गतिरोध कम होने की उम्मीद है।
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FAQs
Q1. परिसीमन विधेयक 2026 (Delimitation Bill, 2026) क्या है?
Ans: परिसीमन विधेयक, 2026 देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने और जनसंख्या के संतुलन के आधार पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए लाया गया एक महत्वपूर्ण विधेयक है. इसके तहत लोकतंत्र की मूल भावना— “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” को मजबूती देने का प्रयास किया गया है.
Q2. क्या नए परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों की लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी?
Ans: बिल्कुल नहीं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि प्रस्तावित “50% बढ़ोतरी मॉडल” के लागू होने से दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों में भारी वृद्धि होगी. कुल मिलाकर दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी और संसद में उनकी कुल प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 24% पर वैसी ही बनी रहेगी.
Q3. परिसीमन के बाद लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़कर कितनी हो जाएगी?
Ans: नए विधेयक और 50% वृद्धि मॉडल के तहत लोकसभा सीटों की वास्तविक संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी, गृह मंत्री ने यह भी बताया कि 850 सीटों का आंकड़ा केवल एक ऊपरी सीमा (rounded-off upper limit) को दर्शाता है, जबकि वास्तविक सीटों की सटीक संख्या 816 होगी.
Q4. क्या परिसीमन प्रक्रिया वर्ष 2029 के चुनावों से पहले लागू हो जाएगी?
Ans: नहीं, गृह मंत्री ने स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद ही प्रभावी होगी, इसलिए, 2029 से पहले इसे लागू करने का कोई प्रश्न नहीं उठता. 2029 तक होने वाले सभी चुनाव पुरानी व्यवस्था और वर्तमान सीटों के आधार पर ही संपन्न होंगे.
Q5. जातिगत जनगणना (Caste Census) को लेकर गृह मंत्री ने क्या स्पष्टीकरण दिया?
Ans: गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि देश की जनगणना दो अलग-अलग चरणों में होती है:
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पहला चरण: मकानों का सूचीकरण (Houselisting), जो अभी चल रहा है, चूंकि मकानों की कोई जाति नहीं होती, इसलिए इस चरण के प्रपत्र (form) में जाति का विकल्प नहीं रखा गया है.
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दूसरा चरण: व्यक्तियों की व्यक्तिगत गणना, जब इस दूसरे चरण में व्यक्तिगत स्तर पर नागरिकों की गणना शुरू होगी, केवल तब जातिगत जनगणना का विकल्प और सवाल सामने आएगा.
