Chandigarh High Court: चंडीगढ़ में बेसमेंट कोचिंग संस्थानों पर हाईकोर्ट की सख्ती, दे दिया बड़ा आदेश

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Chandigarh High Court: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में बेसमेंट में संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों को बंद करने की मांग पर दायर याचिका का निपटारा करते हुए यूटी प्रशासन को तीन माह के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में कार्रवाई नहीं होती है, तो याचिकाकर्ता दोबारा हाईकोर्ट का रुख कर सकता है।

याचिका में तत्काल कार्रवाई की मांग

हाईकोर्ट में यह याचिका अधिवक्ता निखिल थम्मन ने दायर की थी। इसमें उन्होंने दिल्ली में हुए एक बड़े हादसे से सबक लेते हुए उन कोचिंग संस्थानों को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग की थी, जो चंडीगढ़ के बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं और अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना कार्य कर रहे हैं। याचिका में इन संस्थानों को चंडीगढ़ बिल्डिंग रूल्स 2017 और अग्नि निवारण एवं सुरक्षा नियम 1991 का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि चंडीगढ़ के सेक्टर 34 और सेक्टर 17 जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित कोचिंग संस्थान किसी भी अप्रिय घटना के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इन संस्थानों की बढ़ती संख्या पर कोई स्पष्ट नियमन नहीं होने के कारण छात्रों की सुरक्षा खतरे में है।

अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि चंडीगढ़ के कई कोचिंग संस्थान अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। अग्नि सुरक्षा के तहत 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों में अग्निशमन विभाग से प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। इसके लिए इमारत में कुछ मानदंडों को पूरा करना होता है, जैसे:

  • सभी मंजिलों पर अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता।
  • स्वचालित स्प्रिंकलर प्रणाली।
  • बिना बाधा के आपातकालीन निकास।
  • प्राकृतिक वेंटिलेशन और प्रकाश व्यवस्था।
  • अग्निरोधी सामग्री से उपचारित फर्नीचर।

याचिका में यह भी कहा गया कि इन नियमों की अनदेखी छात्रों के जीवन को खतरे में डाल रही है।

प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जानकारी

हाईकोर्ट को सूचित किया गया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने सात कोचिंग संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इसके बाद संबंधित एसडीएम अगली कार्रवाई करेंगे। प्रशासन की इस जानकारी के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता तीन माह के बाद दोबारा अदालत आ सकता है, यदि तय समय सीमा में उचित कार्रवाई नहीं होती है।

जनहित के लिए एक महत्वपूर्ण कदम

यह मामला चंडीगढ़ में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा करता है। हाईकोर्ट का यह निर्देश न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए प्रेरित भी करता है।

याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले को छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर निष्क्रियता का आरोप लगाया। कोर्ट ने इस याचिका पर गंभीरता दिखाते हुए तीन माह के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। यह निर्देश छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।