कर्नाटक कांग्रेस संकट में: सिद्धारमैया की विदाई राहुल गांधी के लिए क्यों बन सकती है बड़ी राजनीतिक चुनौती
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन से सुलझा विवाद, लेकिन बढ़ा नया राजनीतिक जोखिम
कर्नाटक में लंबे समय से चल रहे नेतृत्व विवाद पर कांग्रेस हाईकमान ने आखिरकार फैसला लेते हुए सिद्धारमैया से मुख्यमंत्री पद छोड़ने को कहा और डीके शिवकुमार के लिए रास्ता साफ कर दिया। इससे पार्टी के अंदरूनी टकराव को भले ही फिलहाल शांत कर दिया गया हो, लेकिन इस फैसले ने कांग्रेस के लिए एक नया राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।
सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। खास बात यह है कि इस फैसले का असर सीधे राहुल गांधी की राजनीतिक छवि पर पड़ता दिख रहा है।
राहुल गांधी की OBC राजनीति को लग सकता है झटका
राहुल गांधी पिछले कुछ वर्षों से खुद को पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों की आवाज़ के तौर पर पेश करते रहे हैं। जातीय जनगणना की मांग और सामाजिक न्याय की राजनीति उनके अभियान का बड़ा हिस्सा रही है।
ऐसे में सिद्धारमैया जैसे बड़े OBC चेहरे को हटाना उनकी इसी छवि को कमजोर कर सकता है।
कांग्रेस शासित राज्यों में कर्नाटक ही ऐसा राज्य था जहां एक मजबूत पिछड़े वर्ग का नेता मुख्यमंत्री था। अब उनके हटने के बाद कांग्रेस के पास किसी भी राज्य में ऐसा प्रमुख OBC चेहरा नहीं बचा है।
सिद्धारमैया क्यों हैं कांग्रेस के लिए अहम
सिद्धारमैया सिर्फ एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे मजबूत जनाधार वाले नेताओं में से एक हैं।
उन्होंने AHINDA (अल्पसंख्यक, हिंदू पिछड़ा वर्ग और दलित) सामाजिक गठबंधन तैयार किया, जिसने 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
उनकी लोकप्रियता खासतौर पर कुरुबा समुदाय और अन्य पिछड़े वर्गों में बेहद मजबूत मानी जाती है।
डीके शिवकुमार की एंट्री से बदला सामाजिक समीकरण
डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जो राज्य की प्रभावशाली जातियों में गिना जाता है।
सिद्धारमैया की जगह शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाना कांग्रेस के सामाजिक संतुलन को बदल सकता है। इससे OBC वोट बैंक में नाराज़गी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
राज्यभर में विरोध, राहुल गांधी के पोस्टर जलाए गए
सिद्धारमैया के हटाए जाने के बाद कर्नाटक के कई जिलों—यादगिरी, रायचूर, कलबुर्गी और शिवमोग्गा—में विरोध प्रदर्शन हुए।
प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ नारे लगाए और राहुल गांधी के पोस्टर तक जलाए।
कुरुबा समुदाय के नेताओं ने इसे पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय बताया है।
कांग्रेस को 2028 चुनाव में हो सकता है नुकसान
कई स्थानीय नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर OBC वोटर नाराज़ हुए तो 2028 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है।
कुछ नेताओं ने यहां तक दावा किया है कि अगर सिद्धारमैया को जबरन हटाया गया, तो कांग्रेस की मौजूदा सीटें काफी कम हो सकती हैं।
राहुल गांधी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय की जो राजनीति खड़ी की है, यह फैसला उसी के खिलाफ जाता दिख सकता है।
विपक्ष पहले ही कांग्रेस पर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने का आरोप लगा रहा है।
अब राहुल गांधी को यह साबित करना होगा कि यह फैसला सिर्फ सत्ता संतुलन के लिए था, न कि पिछड़े वर्गों की अनदेखी।
क्या यह फैसला कांग्रेस पर भारी पड़ेगा?
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन ने फिलहाल पार्टी के अंदरूनी विवाद को शांत किया है, लेकिन इसका राजनीतिक असर आने वाले समय में दिख सकता है।
अगर सिद्धारमैया समर्थकों की नाराज़गी बढ़ती है और AHINDA वोट बैंक कमजोर पड़ता है, तो इसका सीधा असर राहुल गांधी की राष्ट्रीय राजनीति और कांग्रेस की दक्षिण भारत की रणनीति पर पड़ सकता है।

